Gandhi Jayanti Speech in Hindi 2023 (गांधी जयंती पर भाषण हिंदी में 2023): देखने में तेरी हस्ती थी छोटी, लेकिन तुझे देख झुकती थी हिमालय की भी चोटी..आजादी के आंदोलन के महानायक महात्मा गांधी पर ये पंक्ति सटीक (Gandhi Jayanti Speech) बैठती है। सूट बूट वाले अंग्रेज कभी बापू की धोती और लंगोटी का भेद समझ नहीं पाए। बापू को आजादी के आंदोलन का महानायक कहा जाता है। उन्होंने ना केवल भारत को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त करवाया बल्कि आजाद भारत को आत्मनिर्भर बनाने का रास्ता (Gandhi Jayanti Speech In Hindi) भी दिखाया। उनके विचार और उद्देश्य आज के युग में काफी (Gandhi Jayanti 2023 Speech) प्रासंगिक हैं।
एक जमाने में तत्कालीन ब्रिटिश के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने महात्मा गांधी को अधनंगा फकीर कहकर उनका मजाक बनाया था, लेकिन उन्हें कहां पता था कि एक दिन वही फकीर उनकी प्रतिमा के बगल खड़ा होगा और दुनिया उनके सामने (Gandhi Jayanti Speech in Hindi 10 Lines) नतमस्तक होगी। बापू की सादगी व विनम्रता की पूरी दुनिया दीवानी थी। इतना ही नहीं मार्टिन लूथर किंग भी उनकी सादगी से (Gandhi Jayanti Speech For Teachers) प्रभावित थे। इतिहासकारों की मानें तो उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर नस्लीभेद का व्यापक आंदोलन चलाया था और साल 965 में उन्हें सफलता मिली थी। महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी थी। उनके पिता करमचंद गांधी राजकोट में दीवान थे और माता पुतलीबाी गृहंणी थी। गांधी जी अपने तीन भाई बहनों में सबसे छोटे थे।
Gandhi Jayanti Speech: महात्मा गांधी की 154वीं जन्म जयंती
इस बार भारत देश महात्मा गांधी की 154वीं जन्मजयंती मनाने जा रहा है। इस खास मौके पर स्कूल, कॉलेज व अन्य शैक्षणिक संस्थानों से लेकर सरकारी कार्यालयों व विभागों में तमाम तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। साथ ही भाषण व निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। ऐसे में इस खास मौके पर हम आपके लिए 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर दमदार भाषण लेकर आए हैं। कुछ इस तरह भाषण देकर आप लोगों को अपना मुरीद बना सकते हैं।Gandhi Jayanti Speech: कुछ इस तरह करें भाषण की शुरुआत
यदि आप चाहते हैं कि भाषण की शुरुआत के साथ तालियों की गड़गड़ाहट आपके आवाज को बुलंद कर दे तो अपने भाषण की शुरुआत गांधी जी के किसी शानदार पंक्ति या कविता से करें। यकीन मानिए लोग आपकी तारीफ करते नहीं थकेंगे।डर शरीर का रोग नहीं है, यह आत्मा को मारता है।
-महात्मा गांधी
उफनते तूफ़ान को मात देना है तो अधिक जोखिम उठाते हुए हमें पूरी शक्ति के साथ आगे बढ़ना होगा।
-महात्मा गांधी
मन में थी अहिंसा की लगन, तन पर एक लंगोटी
लाखों में घूमता था लिए शक्ति की सोंटी
वैसे तो देखने में थी तेरी हस्ती छोटी,
लेकिन तुझे देख झुकती थी हिमालय की भी चोटी।
